MP में पदोन्नति पर नौ साल से लगा प्रतिबंध हटने की संभावना, सरकार ने पदोन्नति के लिए तीन विकल्प…

MP News: मध्य प्रदेश में सिविल सेवकों की पदोन्नति को लेकर अच्छी खबर आई है। राज्य में पदोन्नति पर नौ साल से लगा प्रतिबंध हटने की संभावना है। यदि इसे लागू किया गया तो हजारों कर्मचारियों का इंतजार खत्म हो जाएगा। आपको बता दें कि इस दौरान 100,000 से अधिक कर्मचारी बिना पदोन्नति के सेवानिवृत्त हो गए हैं।
इसीलिए रोक दिया गया प्रमोशन
आपको बता दें कि 2002 में तत्कालीन सरकार ने पदोन्नति के लिए नियम बनाए और पदोन्नति में आरक्षण लागू किया। नतीजतन, आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति मिलती रही, लेकिन अनारक्षित वर्ग के कर्मचारी पीछे रह गए। जब इस मुद्दे पर विवाद बढ़ने लगा तो श्रमिकों ने अदालत का रुख किया। उन्होंने कोर्ट से प्रमोशन में आरक्षण खत्म करने की मांग की थी, जिसके बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 2016 में इस नियम को खत्म कर दिया था। लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ और सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और प्रमोशन प्रक्रिया पूरी तरह से रोक दी गई।
सरकार ने पदोन्नति के लिए तीन विकल्प बनाए हैं
- कर्मचारियों को उनकी वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नत किया जाएगा, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वरिष्ठता की गणना किस तिथि से की जाएगी।
- वर्ष 2002 से पदोन्नत 60,000 से अधिक एससी-एसटी कर्मचारियों को पदावनत नहीं किया जाएगा। हालांकि, हाईकोर्ट ने 31 मार्च 2024 के अपने फैसले में कहा था कि 2002 के आधार पर की गई पदोन्नतियां रद्द की जाएं, लेकिन सरकार इसके लिए नया समाधान निकालेगी।
- यह पदोन्नति प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों में अंतिम निर्णय के आधार पर की जाएगी।
आपको बता दें कि मध्य प्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है जहां इतने सालों से सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति पर रोक लगी हुई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा और पदोन्नति प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। पदोन्नति पर सीएम मोहन यादव के बयान के बाद कर्मचारियों में उम्मीद बढ़ी है, लेकिन यह तभी संभव होगा जब पदोन्नति संबंधी मुद्दों का विपक्ष के सहयोग से स्थायी समाधान निकलेगा।