रीवा के बाद अब सीधी में बोरवेल पर बड़ा एक्शन, कलेक्टर ने जिले वासियों को दिए निर्देश, जाने क्या 

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कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी स्वरोचिष सोमवंशी ने जिले के सभी संबंधित विभागों को खुले बोरवेल, कुएं, बावड़ी, खुले जलस्रोत एवं बिना प्रकरण वाले गड्ढों जैसी संरचनाओं का सर्वेक्षण कर सभी सुरक्षात्मक उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे बोरवेलों के क्रॉसिंग पाइप क्षतिग्रस्त या विफलता के कारण हटा दिए जाते हैं या खुले छोड़ दिए जाते हैं, जिससे बोर डूब जाते हैं और खतरनाक हो जाते हैं। इसी प्रकार, कुओं और बावड़ियों पर फर्श गार्डर रखकर या उन्हें सीमेंट कंक्रीट से बनाकर ऐसे निर्माण किए जाते हैं, जिससे पतन, बच्चे का गिरना और अन्य गंभीर घटनाएं होती हैं। इन घटनाओं के घटित होने से प्रशासन को आपातकालीन स्थितियों एवं आपदा प्रबंधन की आपात स्थितियों का सामना करना पड़ता है। गृह विभाग पहले ही जरूरी कदम उठाने का आदेश दे चुका है.

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जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जिले के अंतर्गत शहरी/ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी विभागों द्वारा बनाये गये बोर जो फेल हो गये हैं, उन्हें सूचीबद्ध किया जाये तथा विभाग द्वारा उन पर कैप लगाकर तत्काल प्लग करने की कार्यवाही की जाये। जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में, जिन भूमि मालिकों की भूमि पर बोरवेल, बावड़ी, खुले जल स्रोत और गड्ढे हैं, उनका सर्वेक्षण किया जाना चाहिए और सूचीबद्ध किया जाना चाहिए और ऐसी संरचनाओं को तुरंत बंद करने के उपाय किए जाने चाहिए। इसी प्रकार जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कुआं एवं खुले कुआं विहीन होने से दुर्घटना का खतरा बना रहता है। यदि उक्त कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण नहीं होता है तो संबंधित नगरीय निकाय एवं ग्राम पंचायत अनुविभागीय दण्डाधिकारी को लिखित सूचना देंगे। अनुविभागीय मजिस्ट्रेट ऐसे खुले बोरों और कुओं से ऐसे अवैध निर्माणों को उचित रूप से हटाने और उन्हें पाटने के लिए उपाय करेगा। उक्त कार्यवाही की पुष्टि ग्राम पंचायत/नगरीय निकाय के माध्यम से करायी जाये तथा उक्त कार्य पर व्यय की गयी सम्पूर्ण धनराशि भूमि स्वामी से वसूल की जाये। जिन भू-स्वामियों ने निर्देशानुसार बोरवेल/कुओं को भरने के निर्देशों का पालन नहीं किया है, उनके विरुद्ध अनुविभागीय मजिस्ट्रेट द्वारा उचित आपराधिक एवं निषेधाज्ञा कार्रवाई की जानी चाहिए। उक्त कार्यवाही कर 03 दिवस के अन्दर निर्धारित प्रपत्र में जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये हैं।

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