गर्मी की छुट्टियों में बच्चों को दे रहे व्यवसायिक शिक्षा का ज्ञान शिक्षक महेंद्र सिंह ठाकुर का अनूठा प्रयास

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संवाददाता-अज्जू सोनी उमरिया पान ढीमरखेड़ा कटनी

गर्मी की छुट्टियों में बच्चों को दे रहे व्यवसायिक शिक्षा का ज्ञान शिक्षक महेंद्र सिंह ठाकुर का अनूठा प्रयास

ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र अंतर्गत आने वाली शासकीय माध्यमिक शाला गौरा मैं पदस्थ शिक्षक महेंद्र सिंह ठाकुर के द्वारा सरकार की मंशा से कहीं आगे बढ़-चढ़कर बच्चों के भविष्य को सवारने का प्रयास निरंतर नए-नए प्रयासों से किया जा रहा है वर्तमान में शिक्षक के द्वारा गर्मी की छुट्टियों में बच्चों को व्यवसायिक शिक्षा अध्ययन के लिए स्वयं के व्यय से सामग्री क्रय कर व्यवसायिक शिक्षा में जैसे संगीत की शिक्षा प्राथमिक स्वास्थ्य /खून जांच की प्रारंभिक शिक्षा, बेल्डर (बेल्डिंग वर्क) की शिक्षा, कंप्यूटर की शिक्षा इलेक्ट्रिकल की शिक्षा चित्रकारिता /पेंटिंग की शिक्षा क्लासिकल /क्षेत्रीय नृत्य की शिक्षा उद्यानिकी /आयुर्वेद औषधियों की शिक्षा कृषि/पशुपालन की शिक्षा योगा/खेल की शिक्षा सिलाई ,कढ़ाई,बुनाई,क्राफ्ट, मेंहदी,रंगोली की शिक्षा योगा/खेल की शिक्षा शिल्पकारिता की शिक्षा दी जा रही है 

तत्कालीन कलेक्टर विशेष गढ़पाले ने माना था प्रदेश का पहला शासकीय स्कूल शिक्षक महेंद्र सिंह ठाकुर ने विद्यालय हमारा देवालय की बात को सच कर दिखाने की जानकारी तत्कालीन कलेक्टर विशेष गढ़पाले को मिलने के बाद कलेक्टर के द्वारा विद्यालय का निरीक्षण किया गया जहां कलेक्टर ने प्रदेश का पहला शासकीय स्कूल बताया था जहां शिक्षा के साथ बच्चों को संगीत की शिक्षा दी जाती है शिक्षक ने स्वयं के व्यय से शासकीय स्कूल को निजी स्कूलों की तरह सजा संवार कर रखा है कलेक्टर गढ़पाले के द्वारा जिला शिक्षा समिति की बैठक में बुलवाकर शिक्षक का सम्मान भी किया गया था 

कोरोना महामारी के दौरान जब स्कूल बंद थे तब भी शिक्षक के द्वारा ठेले में प्रोजेक्टर ओर साउंड व्यवस्था के साथ गांव में घूम घूम कर मोहल्ला क्लास का संचालन करने की चर्चा भी पूरे प्रदेश में ठेले वाले मासाब के नाम से हुई थी

2015 से शिक्षक का प्रयास जारी शिक्षक महेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि 15 अगस्त 2015 को माध्यमिक शाला का प्रभार मिलने के बाद निरंतर लगातार विद्यालय में व्यवस्था बनाई जा रही है पूर्व में भवन जर्जर था भवन की मरम्मत कराकर एमल्शन पेंट से रंगाई कराने के बाद विद्यालय प्रांगण में पौधरोपण का की शुरुआत की गई वर्तमान में तकरीबन 200 प्रकार के पौधे लहलहा रहे दीवारों में शिक्षण कार्य से संबंधित चित्र एवं लेखन करवाए गए शुद्ध पेयजल एवं प्रशाधन की व्यवस्था बच्चों को संगीत की शिक्षा देने के लिए उपकरण हर कक्ष में सीसीटीवी कैमरे प्रोजेक्टर एवं कंप्यूटर लैपटॉप के माध्यम से बच्चों को शिक्षा के साथ विद्युत व्यवस्था ना होने के कारण इनवर्टर एवं प्रिंटर की भी व्यवस्था की गई बच्चों के बैठने के लिए गलीचे एवं मेटिंग विद्यालय प्रांगण में सरस्वती माता का मंदिर निर्माणाधीन है एमल्शन पेंट से रंगाई में एक बार का खर्च तकरीबन 60 हजार रुपए आता है 7 वर्षो में तकरीबन 8 से 10 लाख का निजी व्यय हुआ होगा गांव एवं बच्चों से ऐसा लगाव लगा है कि मानो पढ़ने वाले बच्चे खुद के बच्चे हैं और गांव में परिवार जैसा माहौल निर्मित है।।

 

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