​​​​​​​रीवा में ससुर ने रची हत्या की साजिश; सास को मारने के लिऐ बहु को दी तीन हजार रूपए की सुपारी 

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​​​​​​​रीवा में ससुर ने रची हत्या की साजिश; सास को मारने के लिऐ बहु को दी तीन हजार रूपए की सुपारी 

रीवा में बहू ने सास की गला रेतकर हत्या कर दी। इस मामले में अब नया मोड़ आया है। हत्या की साजिश ससुर ने रची और बहू को 3 हजार रुपए में सुपारी दी थी। उसने हत्या के बदले बहू को जिंदगी भर रुपए देते रहने का वादा भी किया था। बहू ने ससुर के दिए हंसिए से ही सास को मौत के घाट उतारा था। पुलिस ने अब ससुर को भी अरेस्ट कर लिया है। मामला मनगवां थाना इलाके के गंगेव चौकी का है।

अतरैला बरासिंहा प्लाट गांव का आरोपी ससुर दूसरी शादी करना चाहता था, इसलिए उसने पत्नी को ठिकाने लगाने की साजिश रची। बहू की सास से पटती नहीं थी, इसी बात का फायदा उसने उठाया। बहू भी लालच और सास से नफरत की वजह से इस काम के लिए राजी हो गई।

मनगवां थाना प्रभारी जेपी पटेल ने बताया कि 12 जुलाई की सुबह 5 बजे सरोज कोल (50) की हत्या कर दी गई थी। पुलिस को शुरुआत से ही बहू कंचन कोल (25) पर शक था। उसे हिरासत में ले लिया गया था। जब उससे सख्ती से पूछताछ की तो उसने सारा सच बता दिया। इसके बाद सरोज के पति बाल्मीकि कोल (55) को भी गिरफ्तार कर लिया गया। 

रोपी घटना से पहले बहन के घर मैहर चला गया

आरोपी बहू ने पुलिस को बताया कि उसका सास से अक्सर झगड़ा होता रहता था। इससे वह परेशान रहती थी। ससुर भी दूसरी शादी करना चाहता था। दोनों ने मिलकर मीटिंग की और सरोज की हत्या की साजिश रची। घटना से एक दिन पहले आरोपी ससुर किसी मामले में पेशी की बात कहकर मैहर चला गया। वहां वह अपनी बहन के घर रुका।

बहू ने सास को सोते समय मारा

साजिश रचने के दूसरे दिन की सुबह सास घर के अंदर सो रही थी। बहू ने पहले उस पर तवे से हमला किया। जब वह बेहोश हो गई, तो उसने ससुर के दिए हंसिए से सास पर ताबड़तोड़ प्रहार किए। आस-पड़ोस के लोगों को आता देख वह भाग निकली। लहूलुहान महिला को मनगवां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां से SGMH रेफर कर दिया गया। यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पति मेरठ में, पत्नी नहीं सुनती थी सास की बात

कंचन का पति मेरठ (UP) में नौकरी करता है। चर्चा है कि वह आए दिन दूसरे लड़कों के साथ बाइक में बैठकर कहीं चली जाती थी। इसका सास​ विरोध करती थी। इसी बात को लेकर अक्सर सास और बहू में लड़ाई होती थी। दादा ससुर बहू (सरोज) का पक्ष न लेकर नत बहू (कंचन) का पक्ष लेता था। तीनों एक-दूसरे के चरित्र पर आरोप लगाते थे। आरोपी बाल्मीकि भी प्राइवेट नौकरी करता है।

 

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